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एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग, भारत के लिए क्यों अहम है SCO Summit? जानें

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Aug 31, 2026 07:35 am IST,  Updated : Aug 31, 2026 08:06 am IST

बिस्केक में SCO सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी स्थापना के 25 साल पूरे हो रहे हैं। इस सम्मेलन में एक ही मंच पर पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नजर आएंगे।

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पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग Image Source : AP

बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान दौरे के बाद  किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच गए। वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।  किर्गिस्तान के मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष आदिलबेक कासिमालिएव ने हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक किर्गिज नृत्य की प्रस्तुति भी हुई। होटल पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया।

पुतिन के साथ पीएम मोदी की मीटिंग

मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव के निमंत्रण पर 31 अगस्त से एक सितंबर तक होने वाले 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं।  SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। इस बार सम्मेलन की थीम ‘सतत शांति, विकास और समृद्धि के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना’ है। पीएम मोदी की सम्मेलन से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। पुतिन के साथ उनकी बैठक आज होने की उम्मीद है।

SCO के 25 साल पूरे

10 सदस्यों वाला एससीओ 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। मोदी के शिखर सम्मेलन से इतर एससीओ के सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की संभावना है, जिनमें किर्गिज राष्ट्रपति झापारोव और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं। 

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है। 

पीएम मोदी ने रवाना होने से पहले क्या कहा था?

प्रधानमंत्री ने शनिवार को मध्य एशियाई देशों की यात्रा पर रवाना होते समय कहा था कि वह इस क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने को लेकर उत्सुक हैं, जो "सुरक्षा, संपर्क और अवसरों" पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खतरे से मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए साथी सदस्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी तत्पर हैं। 

मोदी किर्गिस्तान में छठे विश्व घुमंतू खेल के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस यात्रा से मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी, क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संबंध गहरे होंगे और शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के साझा प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे पहले पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के दौरे पर थे। वहां उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत-उज्बेकिस्तान के ट्रे़ड और दोनों देशों की समान सोच व आकांक्षाओं पर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि उज्बेकिस्तान की मेरी यह चौथी यात्रा है। यह हमारे संबंधों की निकटता करीबी समन्वय और हमारी गहरी मित्रता को दर्शाता है। भारत और उज्बेकिस्तान की सोच और आकांक्षाओं में गहरी समानता है। 

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